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Formula One 2012: फार्मूला वन रेस की कुछ रोचक बातें

Posted On: 23 Oct, 2012 Others में

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formula oneरेस, रफ्तार या स्पीड जब भी इन शब्दों का नाम आता है तो जहन में फार्मूला-1 की वह मोटर स्पो‌र्ट्स कार की तस्वीर उभरकर सामने आती है जो किसी खास तरह के ट्रैक पर (300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी ज्यादा) दौड़ती हुई नजर आती है. फार्मूला मोटर स्पो‌र्ट्स रेसिंग खेल न केवल रफ्तार के शौकीन लोगों का पसंदीदा खेल है, बल्कि इसका जादू आम लोगों के भी सिर चढ़कर बोलता है. शायद तभी टीवी पर जिस खेल को लोग सबसे ज्यादा एंज्वाय करते हैं, उनमें ग्रांड प्रिक्स प्रतियोगिताएं यानि फार्मूला रेसिंग का स्थान सबसे ऊपर है.


Read: Formula 1: फार्मूला वन रेस कार्यक्रम


ऊंचे निचे ढलान और तीखे मोड़ पर कन गाड़ियां दौड़ती हैं तो इसका लुत्फ ना सिर्फ गाड़ी चलाने वाला उठाता है बल्कि इसका जादू दर्शकों के दिलो-दिमाग पर भी खूब पड़ता है. पहले फार्मूला वन रेस सिर्फ विदेशों में ही सोभा बढ़ाते थे अब इसने भारत में भी दस्तक दे दिया है. पिछले साल के सफल आयोजन के बाद इस बार भी 26 से 28 अक्टूबर के बीच ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में फार्मूला वन का आयोजन होगा. यह दूसरा मौका होगा जब भारत के तेज रफ्तार के दीवानों को अपनी दीवानगी लाइव दिखेगी.


भारत में रेसिंग की शुरूआत

भारत में मोटर रेसिंग की शुरुआत 107 वर्ष पहले हुई थी. देश में पहली मोटर रेस 1904 में शुरू हुई थी. यह रेस मोटर यूनियन ऑफ वेस्टर्न इंडिया की ओर से कराई गई थी. रेस दिल्ली से शुरू हुई और मुंबई में खत्म हुई. 1980 के दशक में भारत की रेसों को वैश्विक पहचान मिलनी शुरू हुई. नाजिर हुसैन ने देश में हिमालयन रैली का आयोजन कराया. वर्तमान समय में नारायण कार्तिकेयन और करुण चंडोक देश के रेसरों के लिए प्रेरणा हैं. नारायण कार्तिकेयन एफ-वन रेस में भाग लेने वाले पहले भारतीय बने. भारत की पहली फार्मूला वन रेस इंडियन ग्रां प्री में कार्तिकेयन ने हिस्पानिया रेसिंग टीम की ओर से हिस्सा लिया था. वह पिछली बार इंडियन ग्रां प्री में 17वें स्थान पर रहे. नारायण कार्तिकेयन के पास एक बार फिर इंडियन ग्रां प्री में अपने घरेलू प्रशंसकों के सामने प्रदर्शन करने का मौका है और उन्हें उम्मीद है कि वो अच्छा करेंगे.


निलंबन हुई एयरलाइंस किंगफिशर के मालिक विजय माल्या ने तो इस खेल को अपना पसंदीदा खेल होने के नाते भारत से बिलकुल जोड़ दिया है. माल्या ने 2007 में स्पाइकर फरारी से लगभग 90 मिलियन यूरो में फोर्स इंडिया खरीदी थी. उन्होंने 2008 में इसका नाम फोर्स इंडिया रखा था. पिछले इंडियन ग्रां प्री के सत्र में टीम फोर्स इंडिया नौवें स्थान पर रही. फोर्स इंडिया के पास अभी जर्मनी के आंद्रियन सुतिल और ब्रिटेन के पाल डि रेस्टा ड्राइवर थे.


फार्मूला मोटर स्पो‌र्ट्स रेसिंग की शुरूआत

भारत में इस खेल की शुरुआत अपेक्षाकृत काफी बाद में हुई, जबकि इसके उलट विदेशों में यह एडवेंचर स्पो‌र्ट्स 40-50 के दशक से ही लोकप्रिय होना शुरू हो गया था. 19वीं शताब्दी में फ्रांस में मोटरकार की बिक्री को बढ़ाने के लिए कुछ लोगों ने साधारण सड़कों पर मोटर रेसिंग करना शुरू किया. देखने वालों ने इसे खूब पसंद किया. लेकिन चूंकि सड़कें सामान्य यातायात वाली सड़कें होती थीं, इसलिए आम लोगों के यातायात वाली सड़क होने से दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती थी. ऐसे में जरूरत महसूस हुई एक खास प्रकार के सड़क की, जिस पर मोटर रेस प्रतियोगिता आयोजित की जा सके. इस तरह की सड़क बनाई जाने लगीं और इन पर मोटर रेस का आयोजन किया जाने लगा. इन रेसिंग प्रतियोगिताओं का नाम रखा गया ग्रांड प्रिक्स. आज भी फॉर्मूला 1, 2, 3 प्रतियोगिताओं को ग्रांड प्रिक्स प्रतियोगिता कहते हैं.


क्या है फॉर्मूला 1, 2, 3

सिंगल सीटर स्पो‌र्ट्स मोटर की सबसे बड़ी प्रतियोगिता फॉर्मूला 1 चैंपियनशिप कहलाती है. फॉर्मूला 2 और फॉर्मूला 3 इसके बाद होने वाले निचले स्तर पर आयोजित की जाने वाली प्रतियोगिताएं हैं. ज्यादातर फॉर्मूला रेस यूरोप में ही आयोजित होती हैं.


कार्ट रेसिंग

कार्ट रेसिंग को फॉर्मूला रेसिंग की पहली सीढ़ी माना जा सकता है. चार खुले पहियों, जिसे गो कार्ट कहा जाता है, की सहायता से ड्राइविंग की जाती है. इसमें अपेक्षाकृत कम स्पीड की जरूरत होती है. विश्व के ख्याति प्राप्त फॉर्मूला वन ड्राइवर माइकल शूमाकर, फर्नान्डो एलोंसो, लुइस हेमिल्टन पहले कार्ट रेसिंग में ही भाग लिया करते थे.


कुछ रोचक बातें

* लगभग 80 हजार कारों के कलपुर्जो को मिलाकर एक एफ-1 स्पो‌र्ट्स कार तैयार की जाती है. एक्यूरेसी में थोड़ी-सी कमी होने पर उसे ट्रैक पर उतारा नहीं जा सकता है.

* रेसिंग कार के इंजन की आयु बहुत कम होती है. एक रेस के बाद यह बिल्कुल बेकार हो जाता है.

* रेसर जब फुल ब्रेक लेता है, तो गाड़ी को रुकने में 55 मीटर की दूरी और 1.9 सेकेंड का समय लगता है.

* जुआन फेंगियो ने सबसे अधिक उम्र, यानी 46 वर्ष में एफ-1 चैंपियनशिप में जीत दर्ज की.

* स्पेन के जैम अल्गुआरी सबसे कम उम्र के फॉर्मूला वन रेसिंग चैंपियन हैं


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