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हॉकी को पतन के गर्त में पहुंचाने के लिए जिम्मेदार कौन?

Posted On: 24 Aug, 2012 sports mail में

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indian hockey teamआने वाले 29 अगस्त को नवनिर्वाचित महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी कुछ खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को उनकी उपलब्धियों पर विभिन्न पुरस्कारों से नवाजेंगे. यह वही दिन होता है जिसे हम हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाते हैं. अब दिमाग में सवाल यह उठता है कि जब हमारे देश में कई खेल हैं और लोकप्रियता के मामले में हमारे पास क्रिकेट भी है तो आखिर ऐसी क्या वजह है कि हम हॉकी के एक खिलाड़ी के जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाते हैं. इसका एक ही उत्तर हो सकता है मेजर ध्यानचंद की उपलब्धि जो बेहद महत्वपूर्ण रही है.


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भारत में मेजर ध्यानचंद का दर्जा एक हॉकी खिलाड़ी से भी ऊपर है. उन्होंने ऐसे समय में भारत का नाम विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाया जब भारत को स्वाधीनता भी नहीं मिली थी. आज भारत को ओलंपिक खेलों में एक पदक लाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है लेकिन एक समय था जब ध्यानचंद ने हॉकी में ओलंपिक खेलों में लगातार तीन स्वर्ण पदक (1928, 1932 और 1936) दिलाने में अहम योगदान दिया. जिस खेल को इस खिलाड़ी ने लोगों के दिलों दिमाग तक पहुंचाकर राष्ट्रीय खेल का दर्जा दिलवाया गया वही खेल आज पतन के गर्त में जाता हुआ दिखाई दे रहा है.


लंदन ओलंपिक 2012 से पहले जिस तरह से खेल के महारथी (विशेषज्ञ) यह कयास लगा रहे थे कि भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन इस बार अच्छा होगा उन सब पर पानी फिर गया. भारतीय हॉकी टीम इस बार भी फिसड्डी साबित हुई. इतिहास में यह पहला मौका है, जब ओलंपिक में भारतीय टीम आखिरी पायदान पर अर्थात 12वें स्थान पर थी. जिस खेल के पीछे हमारा सुनहरा इतिहास है उस खेल के खिलाडियों ने पूरे देश को शर्मसार किया. एक तरफ जब हम इतिहास में हॉकी के 8 ओलंपिक स्वर्ण पदक की चर्चा करते हैं तो हमारा सीना गर्व से ऊंचा हो जाता है वहीं जब हम आज के हॉकी खेल की चर्चा करते हैं तो लगता है जैसे कोई हमारे घाव को हरा कर रहा हो.


आखिर कौन है जिसने भारतीय हॉकी खेल को एक बीमार मरीज बना दिया:


1. क्या सरकारी लापरवाही और क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता ने हॉकी से उसका स्थान छीन लिया है?

2. क्या इंडियन हॉकी फेडरेशन और हॉकी इंडिया के बीच टकराव ने हॉकी को गर्त में डाल दिया है ?

3. क्या भारतीय हॉकी टीम को मन-मुताबिक कोच नहीं मिल रहा है?

4. क्या खिलाड़ियों में आपसी तालमेल की कमी है?


आप उपरोक्त सवालों पर अपने विचार टिप्पणी या स्वतंत्र ब्लॉग लिख कर जारी कर सकते हैं.


Read : क्या सुनहरा दौर था भारतीय हॉकी का


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DHARAMSINGH के द्वारा
August 24, 2012

इन मे से कोईभी कारण नही हैअसल  कारण है भारत मे कोई भी काम मैरिट पर नही होता  हर काम  कोटे व आरक्षण से तथा तुष्टी करण से होता है खिलडियो का सलैकसन भी ईस बिमारी से नही बचा हाकी का भट्टा क्रिकेट के लोकप्रियय  होने से बहुत पहले  बैठ चुका था


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