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लंदन ओलंपिक 2012: पी. कश्यप ने जगाई उम्मीद

Posted On: 17 Jun, 2012 sports mail में

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p kashyapखेल के क्षेत्र में यदि कोई खिलाड़ी उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन करता है तो उसे हर तरफ से मान-सम्मान और इज्जत मिलने लगती है. हर कोई उसकी प्रशंसा करने लगता है. उसकी प्रशंसा में चार चांद तब और लग जाता है जब वह विश्व के किसी चोटी के खिलाड़ी को हराता है. जकार्ता में चल रहे इंडोनेशियाई ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट (Indonesia Open Super Series badminton ) में गुरुवार को भारत के पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap ) ने विश्व के नंबर तीन खिलाड़ी और टूर्नामेंट में सर्वोच्च वरीयता प्राप्त चीन के चेन लोंग को 21-17, 21-14 हरा कर अपने पहले सुपर सीरीज क्वॉर्टर फाइनल में जगह बनाई. विश्व के 26वें वरीयता प्राप्त खिलाड़ी कश्यप ने लोंग के खिलाफ यह मुकाबला 45 मिनट में अपने नाम किया. दोनों खिलाड़ियों के बीच यह पांचवीं भिड़ंत थी. इससे पहले तीन बार लोंग विजयी रहे हैं जबकि एक बार कश्यप ने बाजी मारी है.


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पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap ) यहीं नहीं थमे शुक्रवार को इसी टूर्नामेंट में उन्होंने डेनमार्क के हंस क्रिश्टिचयन विटिंगस पर सीधे गेम में जीत दर्ज करके इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन के सेमीफाइनल में प्रवेश किया.


इससे पहले पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap ) नई दिल्ली में हुई इंडिया ओपन सुपर सीरीज में आखिरी लम्हे में लंदन ओलंपिक के लिए अपना टिकट पक्का करने में कामयाब रहे.


हैदराबाद के गोपीचंद बैडमिंटन अकेडमी में प्रशिक्षण लेने वाले कश्यप का जन्म 8 सितंबर, 1986 को हुआ. छोटी से उम्र में ही उन्होंने बैडमिंटन के हर पैंतरे को समझना शुरू कर दिया था. वह लगातार अपने गुरू पुलेला गोपीचंद के अंतर्गत बैडमिंटन की ट्रेनिंग लेते आ रहे हैं. हैदराबाद से प्रतिनिधित्व करने वाले कश्यप ने अपने कॅरियर की शुरुआत नेशनल जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप के एकल खिताब से की. 2006 के हॉगकॉग ओपन में उन्होंने दुनिया के 19वें नंबर के खिलाड़ी को प्री क्वाटर फाइनल में हराकर सबको चौंका दिया था. इसी साल उनके बेहतर प्रदर्शन के बाद ही वे 100 के बदले 64वें स्थान पर आ गए थे.


अर्थव्यवस्था की तरह चीन का खेल क्षेत्र भी काफी विकसित है. कई बड़े टूर्नामेंटों में इसके खिलाड़ियों ने यह साबित करके दिखाया भी है. ऐसे में भारत के खिलाड़ी द्वारा चीन के किसी बड़े खिलाड़ी को हराना चीन के गले न उतरने जैसा है. कश्यप की जीत से भारत के उन करोड़ों लोगों की उम्मीद जगी है जो ओलंपिक में एक मेडल के लिए तरस जाते हैं.


क्या आप जानते हैं भारत का पहला मेडल कब आया ?




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