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पांच करोड़ के थीम सांग पर भी अंगुलियां उठीं [Commonwealth Games Blog]

Posted On: 6 Sep, 2010 sports mail में

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आस्कर पुरस्कार जीत चुके संगीतकार एआर रहमान को जब राष्ट्रमंडल खेलों के लिए थीम सांग रचने को कहा गया था तो पूरे भारतवर्ष ने यह उम्मीद लगायी थी कि शायद यह सांग भी पूरे विश्व को “’जय हो”’ कराएगा, परन्तु अब वही लोग इस थीम सांग से कुछ निराश से लग रहे हैं.

लोगों का कहना है कि गाना तो अच्छा है, लेकिन राष्ट्रमंडल खेल एक अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता है और यह थीम सांग अंतरराष्ट्रीय कसौटी पर खरा नहीं उतरता. रहमान को एक ऐसा सांग रचना चाहिए था जो शकीरा के फीफा विश्व कप 2010 दक्षिण अफ्रीका के सांग “वाका – वाका” की तरह लोगों को पसंद आए.YouTube Preview Image

नाराज़ दिखे शाहनवाज हुसैन

राष्ट्रमंडल खेलों के थीम सांग से पूर्व खेल मंत्री शाहनवाज हुसैन भी नाराज़ दिखे. उन्होंने आस्कर पुरस्कार जीत चुके संगीतकार एआर रहमान से नया गीत रचने की मांग तक कर दी.

हुसैन के अनुसार इस गाने में काफ़ी धन खर्चा हुआ था और इसके बावजूद रहमान द्वारा तैयार किया गया थीम सांग निराशाजनक है और उनसे इस गीत को फिर से तैयार करने के लिए कहा जाना चाहिए. राजग सरकार के समय खेल मंत्री रहे हुसैन ने कहा कि जनता को उम्मीद थी कि यह गीत काफी हिट होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. खबर है कि राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति ने इस गीत पर पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है. इस गीत को सुखविन्दर, शंकर महादेवन और रहमान ने आवाज दी है. गीत को रहमान ने सोमवार को जारी किया. तीन से 14 अक्टूबर तक होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान इस गीत को बजाया जाएगा और ऐसे में अगर यह गीत कसौटी पर खरा ना उतरे तो निराशा तो होएगी ही.

Almost more than Five Crore Indian Rupees were spend over the theme song of the Common Wealth Games Delhi 201. Which is being composed by Oscar Winner Indian Music Director A.R. Rahman but it seems that the song is not liked by peoples. Former Sports Minister Shahnawaz Hussain has asked that the theme song for the Common Wealth Games should be reformed.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akriti के द्वारा
December 3, 2010

2 जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्‍थ घोटाला, आदर्श सोसायटी घोटाला , कनार्टक में जमीन घोटाला… न जाने और कितने घोटाले ऐसे हैं जिनका खुलासा अभी होना है. घोटालों और भ्रष्‍टाचार की यह आंधी देश की राजनीति में उथल पुथल मचाकर रख दी है

Ashok Singh Bharat के द्वारा
September 7, 2010

थीम सांग..की प्रासांगिकता तभी सार्थक होगा, जब वह आम और खास दोनों ही लोगों में पसंद किया जाए। लेकिन, मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार अगर लोगों में निराशा व्याप्त हो रही है, तो इसके लिए संगीतकार रहमान का दोषी नहीं है । क्योकि जय हो जय हो की विश्वव्यापी प्रसिद्धि के बाद देश ने इनसे कुछ ज्यादा अपेक्षाएं कर ली। खेल शुरू होना है..अभी थीम सांग को बजना है..बगैर बजे ही इस पर कोई टिप्पणी करना, इसके साथ बलात्कार से कमतर नहीं होगा। अगर मुझे कुछ अखर रहा है तो वह है इसकी करोड़ों की लागत । पांच करोड़ से ज्यादा का खर्च होना, कुछ हजम नहीं हो रहा है। देश के लिए रहमान को चाहिए था कि वह यह थीम सांग बगैर कोई खर्च लिए करते। देश हित से बड़ी व्यवसायिकता नहीं हो सकती है। मैंने थीम सांग को सुना है, पर अभी कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

आर.एन. शाही के द्वारा
September 6, 2010

कलाकारों की मनोवृत्तियां हमेशा एक जैसी ऊर्जासम्पन्न नहीं होतीं । थीम-सांग का उम्मीदों की कसौटी पर खरा न उतर पाना तो यही साबित करता है । यदि उन्हें यह ज़िम्मेदारी कलमाडी प्रकरण के बाद मिली हो, तो उसका भी मनोवैज्ञानिक असर कलाकार मन पर पड़ने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है । अच्छा प्रस्तुतिकरण, बधाई ।


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